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गणतंत्र

रावी के तट पर

लाहौर के अधिवेशन में

दिसंबर 1929 को

लहरा तिरंगा प्रण लिया

पूर्ण स्वराज का संकल्प लिया

हर गाँव-घर आज़ादी होगी

चरखा नभ को चूमेगा

26 जनवरी 1930 से

हम आज़ाद है, भारत बोलेगा

टूटेंगे गोलमेज़ सभी

नमक हिंदुस्तान भी तौलेगा

सत्य, विनय, अवज्ञा के पथ से

अंग्रेज भारत छोड़ेगा

उन्होंने भी खूब बल दिया

भेजा क्रिप्स मिशन को, बात किया

जब चर्चे सारे विफल हुए

तोड़ा देश को, निकल लिए

15 अगस्त की दोपहर

प्रिंसेस पार्क में ध्वजारोहण कर

आखिर हम आज़ाद हुए

परतंत्रता से स्वराज हुए

स्वराज को संपूर्ण करने को

सबको सत्ता पूर्ण करने को

संविधान सभा का गठन हुआ

जिसके अध्यक्ष पद पर

प्रसाद का चयन हुआ

अतुल्य अंबेडकर की भूमिका थी

ड्राफ्टिंग समिति की अध्यक्षता की

2 साल 11 महीने 18 दिन दिया

विश्व का सबसे लंबा

लिखित संविधान तैयार किया

दिन वो 26 नवंबर था

जब संविधान उपहार मिला

स्वतंत्र भारत मां के तन का

आभूषणों से श्रृंगार हुआ

फिर कभी जनवरी 26 को

जब था भारत आज़ाद हुआ

फहरा तिरंगा राष्ट्रपति ने

देश को गणतंत्र किया

धर्म-जाति का भेद मिटा

लोकतंत्र का मंत्र दिया

22 भाग, 12 अनुसूची

395 अनुच्छेदों से सजे

इस ग्रन्थ को

ज़रिया बनाया गया

निर्भरता से उठकर

होने प्रभुता संपन्न को

ये इस राष्ट्र की प्रस्तावना है

अनेकता में एकता और

अखंडता की भावना है

हो समता, स्वतंत्रता और

न्यायपूर्ण आचार सभी

हम को अधिकारों का ज्ञान रहे

हम कर्तव्यशील हो ध्यान रहे

हो प्रचार समाजवाद का

हो व्यवहार निष्पक्षवाद का

हम संग, सतत, सुमार्ग चले

आओ मिलकर एक यशस्वी

लोकतंत्रात्मक गणराज्य बने।