कविताएँ > कुछ ही देर की बात है
कुछ ही देर की बात है
हमें जान कर क्या करोगे
कुछ ही देर की बात है
बेवजह हमपे मरने लगोगे
कुछ ही देर की बात है
फिर ना दिखे तो तरसोगे
कुछ ही देर की बात है
शिकायतें हमसे करने लगोगे
कुछ ही देर की बात है
फिर दिल में उतारने लगोगे
कुछ ही देर की बात है
बात-बात पर लड़ने लगोगे
कुछ ही देर की बात है
बिछड़ने से डरने लगोगे
कुछ ही देर की बात है
फिर छोड़ किसी रोज़ कहीं दूर निकल पड़ोगे
कुछ ही देर की बात है
और मैं फँसा रह जाऊँगा
एहसासों के समंदर में
तेरे ख़यालों के बवंडर में
दिन, हफ्ते, महीने गुजर जाएँगे
कैसे कहे कि हम सवर पाएँगे
फिर क्या तुम खुदको मुझसे छुड़ा ले जाने
वापिस लौट कर आओगे
अपनी यादों को उड़ा ले जाने
कोई आँधी बन कर आओगे
और अगर नहीं, तो रहने दो
जो ये हल्की सी मुलाकात है
क्योंकि हमें जान कर क्या करोगे
कुछ ही देर की तो बात हैं।