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शुक्रिया

ना कोई उपहार मिला

ना उम्रभर का प्यार मिला

ना मिला कोई साथी मंजिल तक चलने को

मिला तो बस मुसाफिरों का साथ मिला।

उन सब मुसाफिरों का शुक्रिया

यादों में आने वालों का शुक्रिया

दिल लगाने वालों का शुक्रिया

जिन्होंने हमे अपनाया, उनका शुक्रिया।

कुछ पास होके दूर रहें

कुछ दूर से भी ख़त लिखते रहें

जो दुआ करी मदद की

जवाब में खुद आ गए

जो पास थें, अकेलेपन का एहसास न दिलाने का शुक्रिया

जो दूर रहे उनके ख़तों का शुक्रिया।

वक़्त गुजरा, ये कलम गुजरा कई कागजों से

एक ही शख्स की तारीफ को लेकर

कई दफ़ा उलझा मेरे आदतों से

उन कागजों को भरने वाले क़लम तेरा शुक्रिया

अपने चेहरे पर नज़्म लिए फिरने वाले

शख्स तेरा शुक्रिया।

फासलों पर रिश्ते बनाने वाले

संग बचपन, संग जवानी गुजारने वाले

वो दोस्त, ज़िन्दगी को जन्नत बनाने वाले

उन हसीन ल्महों का शुक्रिया

तेरी दोस्ती का शुक्रिया।

राहें मिली कइयों से, दिल मिल ना सके

थी कई खामियाँ, साथ रह ना सके

जो भी साथ थें, उन सबका शुक्रिया

जो ना थें, कमियाँ बताने का शुक्रिया।

अगर साथ ना मिले हो अबतक

तो आ जाना हाथों में हाथ लेके

जैसे अंधेरे में निकले कोई मशाल लेके

अबतक के जलते मशालों का शुक्रिया

रोशनी की अहमियत बताने वाले अंधेरे तेरा शुक्रिया।

॥ शुक्रिया॥